गांधी एवं पंचायती राज की गांधीवादी अवधारणा
Keywords:
पंचायती राज, गांधीवादी दर्शन, विकेंद्रीकरण, ग्रामीण विकास, नागरिक भागीदारीAbstract
यह शोध महात्मा गांधी की पंचायती राज अवधारणा के मूल सिद्धांतों—स्वशासन, विकेंद्रीकरण, आत्मनिर्भरता और जनभागीदारी- का विश्लेषण करने तथा आधुनिक ग्रामीण प्रशासन और ग्रामीण विकास में उनकी प्रासंगिकता को मूल्यांकित करने के उद्देश्य से किया गया। अध्ययन में मिश्रित अनुसंधान पद्धति अपनाई गई, जिसमें 150 ग्रामीण नागरिकों और पंचायत सदस्यों से सर्वेक्षण, साक्षात्कार और अवलोकन द्वारा प्राथमिक डेटा एकत्र किया गया, जबकि गांधी साहित्य, सरकारी दस्तावेज़ों और पूर्ववर्ती अध्ययनों से द्वितीयक डेटा लिया गया। संकलित आंकड़ों का विश्लेषण वर्णनात्मक सांख्यिकी, टी-परीक्षण और काय-स्क्वायर परीक्षण के साथ-साथ थीमैटिक और सामग्री विश्लेषण द्वारा किया गया। परिणामों से पता चलता है कि अधिकांश उत्तरदाता गांधीवादी पंचायती राज के मूल तत्वों से परिचित हैं, पंचायतों में नागरिक भागीदारी और पारदर्शिता में वृद्धि हुई है, तथा पंचायती राज प्रणाली ग्रामीण विकास और सामाजिक समानता में सकारात्मक योगदान दे रही है। समग्र रूप से अध्ययन संकेत देता है कि गांधीवादी पंचायती राज आज भी स्थानीय स्वशासन को सुदृढ़ करने और सतत ग्रामीण विकास को दिशा देने वाला एक प्रभावी और प्रासंगिक मॉडल है।
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