विकसित भारत की अवधारणा में गांधी की प्रासंगिकता

Authors

  • डॉ कृष्णा सिंह

Keywords:

गांधीवाद, विकसित भारत, स्वावलंबन, ग्राम स्वराज, सतत विकास

Abstract

यह शोध महात्मा गांधी के विचारों और आदर्शों की विकसित भारत की अवधारणा में प्रासंगिकता का विश्लेषण करता है। शोध के मुख्य उद्देश्य थे: गांधी के विचारों और आदर्शों की समकालीन सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रासंगिकता को समझना; विकसित भारत की अवधारणा में गांधीवादी सिद्धांतों जैसे स्वावलंबन, ग्राम स्वराज, अहिंसा और सतत विकास की भूमिका का मूल्यांकन करना; तथा यह अध्ययन करना कि गांधी के मूल्य और दृष्टिकोण आज के नीति निर्माण और समाज सुधार में किस हद तक मार्गदर्शक हो सकते हैं। इस शोध में विवेचनात्मक और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण अपनाया गया। गुणात्मक पद्धति के अंतर्गत गांधी के ग्रंथों, भाषणों और मौजूदा साहित्य का विषय-वस्तु विश्लेषण और थीमैटिक विश्लेषण किया गया। सांख्यिकीय पद्धति के लिए 160 प्रतिभागियों पर सर्वेक्षण किया गया, जिसमें शिक्षक, नीति निर्माता और आम नागरिक शामिल थे। डेटा का विश्लेषण SPSS/Excel, औसत, मानक विचलन और प्रतिशत के माध्यम से किया गया। शोध में परिकल्पनाओं की पुष्टि के लिए Chi-square और T-test जैसे सांख्यिकीय परीक्षण किए गए। परिणाम दर्शाते हैं कि गांधी के विचार और सिद्धांत आज भी विकसित भारत की अवधारणा में अत्यंत प्रासंगिक हैं, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान रूप से लागू किए जा सकते हैं, और नीति निर्माण तथा समाज सुधार के लिए स्थायी मार्गदर्शक साबित होते हैं।

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How to Cite

डॉ कृष्णा सिंह. (2025). विकसित भारत की अवधारणा में गांधी की प्रासंगिकता. International Journal of Engineering Science & Humanities, 15(1), 188–201. Retrieved from https://www.ijesh.com/j/article/view/496

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