विकसित भारत की अवधारणा में गांधी की प्रासंगिकता
Keywords:
गांधीवाद, विकसित भारत, स्वावलंबन, ग्राम स्वराज, सतत विकासAbstract
यह शोध महात्मा गांधी के विचारों और आदर्शों की विकसित भारत की अवधारणा में प्रासंगिकता का विश्लेषण करता है। शोध के मुख्य उद्देश्य थे: गांधी के विचारों और आदर्शों की समकालीन सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रासंगिकता को समझना; विकसित भारत की अवधारणा में गांधीवादी सिद्धांतों जैसे स्वावलंबन, ग्राम स्वराज, अहिंसा और सतत विकास की भूमिका का मूल्यांकन करना; तथा यह अध्ययन करना कि गांधी के मूल्य और दृष्टिकोण आज के नीति निर्माण और समाज सुधार में किस हद तक मार्गदर्शक हो सकते हैं। इस शोध में विवेचनात्मक और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण अपनाया गया। गुणात्मक पद्धति के अंतर्गत गांधी के ग्रंथों, भाषणों और मौजूदा साहित्य का विषय-वस्तु विश्लेषण और थीमैटिक विश्लेषण किया गया। सांख्यिकीय पद्धति के लिए 160 प्रतिभागियों पर सर्वेक्षण किया गया, जिसमें शिक्षक, नीति निर्माता और आम नागरिक शामिल थे। डेटा का विश्लेषण SPSS/Excel, औसत, मानक विचलन और प्रतिशत के माध्यम से किया गया। शोध में परिकल्पनाओं की पुष्टि के लिए Chi-square और T-test जैसे सांख्यिकीय परीक्षण किए गए। परिणाम दर्शाते हैं कि गांधी के विचार और सिद्धांत आज भी विकसित भारत की अवधारणा में अत्यंत प्रासंगिक हैं, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान रूप से लागू किए जा सकते हैं, और नीति निर्माण तथा समाज सुधार के लिए स्थायी मार्गदर्शक साबित होते हैं।
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