गांधीवादी आंदोलन के साधनों की 21वीं सदी की राजनीति में प्रासंगिकता
Keywords:
गांधीवाद, सत्याग्रह, अहिंसा, स्वराज्य, स्वदेशी, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, नागरिक प्रतिरोध, नैतिक राजनीति, वैश्विक प्रासंगिकताAbstract
यह अध्ययन गांधीवादी आंदोलन के साधनों की 21वीं सदी की राजनीति में प्रासंगिकता” पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य समकालीन राजनीतिक संदर्भ में गांधीवादी आंदोलन के प्रमुख साधनों अहिंसा, सत्याग्रह और असहयोग की भूमिका को समझना, आधुनिक लोकतंत्र में उनके सिद्धांतों की प्रासंगिकता और व्यावहारिक उपयोगिता का विश्लेषण करना, डिजिटल युग और वैश्वीकरण के प्रभावों में इनके परिवर्तन का मूल्यांकन करना तथा समकालीन सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियों में गांधीवादी विचारधारा की संभावनाओं और सीमाओं की पहचान करना है। इस शोध में गुणात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए द्वितीयक डेटा का उपयोग किया गया, जिसमें 2020 से 2025 के बीच प्रकाशित पुस्तकें, शोध पत्र, जर्नल लेख एवं डिजिटल मीडिया सामग्री शामिल हैं। डेटा संग्रह हेतु उद्देश्यपूर्ण नमूना चुना गया और विषयवस्तु विश्लेषण, तुलनात्मक तथा आलोचनात्मक विश्लेषण उपकरणों का प्रयोग किया गया। परिणामों से पता चला कि 41% प्रतिभागियों ने गांधीवादी साधनों को बहुत प्रभावी और 42% ने प्रभावी माना, जो इनकी समकालीन राजनीति में स्थिर भूमिका को दर्शाता है। आधुनिक लोकतंत्र में गांधीवादी सिद्धांतों को 44% ने अत्यंत प्रासंगिक और 42% ने प्रासंगिक बताया, जबकि डिजिटल युग में इनका प्रभाव 38% द्वारा बहुत प्रभावी और 42% द्वारा प्रभावी माना गया। सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियों में गांधीवादी विचारधारा की संभावनाएँ 48% प्रतिभागियों ने अधिक और सीमाएँ केवल 11% ने अधिक मानी। इस प्रकार यह शोध पुष्टि करता है कि गांधीवादी आंदोलन के साधन 21वीं सदी की राजनीति में न केवल प्रासंगिक हैं, बल्कि सामाजिक न्याय, लोकतंत्र और नैतिकता के संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
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