गांधीवाद का सामाजिक न्याय और जाति उन्मूलन में योगदान
Keywords:
गांधीवाद, सामाजिक न्याय, जाति उन्मूलन, अस्पृश्यता, सर्वोदयाAbstract
यह शोध-पत्र गांधीवाद की सामाजिक न्याय संबंधी अवधारणा तथा जाति उन्मूलन में उसके योगदान का विश्लेषण करता है। भारतीय समाज में व्याप्त जातिगत असमानता और सामाजिक बहिष्करण की पृष्ठभूमि में गांधीवाद एक नैतिक एवं मानवीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जो समानता, गरिमा और समरसता पर आधारित है। महात्मा गांधी ने सामाजिक न्याय को केवल संवैधानिक प्रावधानों तक सीमित न रखते हुए इसे सामाजिक चेतना और आत्मपरिवर्तन से जोड़ा। अस्पृश्यता के उन्मूलन हेतु उनके प्रयास—जैसे हरिजन आंदोलन, समावेशी शिक्षा और सामाजिक सुधार—जाति-आधारित भेदभाव के विरुद्ध एक सशक्त नैतिक संघर्ष थे। गांधीवाद सर्वोदया और अंत्योदय के सिद्धांतों के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान पर बल देता है। यह अध्ययन निष्कर्ष निकालता है कि गांधीवादी विचार आज भी सामाजिक न्याय और जाति उन्मूलन के लिए एक प्रासंगिक और प्रेरक वैचारिक आधार प्रदान करते हैं।
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