सारस्वत मोहन मनीषी जी के काव्य में मानवीय संवेदना और सामाजिक मूल्यों का अध्ययन

Authors

  • डॉ. आशा रानी.

Keywords:

मानवीय संवेदना, सामाजिक मूल्य, करुणा, प्रेम, नैतिक चेतना, सामाजिक न्याय, मानवता, समकालीन हिंदी कविता

Abstract

सारस्वत मोहन मनीषी जी का काव्य मानवीय संवेदना और सामाजिक मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण साहित्यिक दस्तावेज है। उनके काव्य में मानव-जीवन के दुख-सुख, संघर्ष, आशा, करुणा और सहानुभूति का गहन चित्रण मिलता है, जो पाठक को मानवीयता के मूल भावों से जोड़ता है। सारस्वत मोहन मनीषी समाज को केवल बाहरी संरचना के रूप में नहीं, बल्कि जीवंत मानवीय संबंधों के ताने-बाने के रूप में प्रस्तुत करते हैं। उनके काव्य में प्रेम, करुणा, सह-अस्तित्व, नैतिकता, सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा जैसे मूल्य प्रमुख रूप से उभरते हैं। कवि समाज में व्याप्त विषमता, संवेदनहीनता और नैतिक पतन के प्रति सजग दृष्टि रखते हुए मानवीय चेतना के पुनर्जागरण का आग्रह करता है। उनके काव्य में व्यक्ति और समाज के अंतर्संबंधों को रेखांकित करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि सामाजिक सुधार का आधार मानवीय संवेदना ही है। सरल, प्रभावशाली और भावनात्मक भाषा-शैली के माध्यम से वे सामाजिक मूल्यों को जनसाधारण तक पहुँचाने में सफल होते हैं। इस प्रकार सारस्वत मोहन मनीषी जी का काव्य समकालीन समाज में मानवीय मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करता है।

References

आग के अक्षर 1982 प्रथम संस्करण, प्रकाषक गांधी नगर दिल्ली पृष्ट संख्या 35

आग के अक्षर 1982 प्रथम संस्करण, प्रकाषक गांधी नगर दिल्ली पृष्ट संख्या 35

वही पृष्ट संख्या 36

वही पृष्ट संख्या 36.37

आग के अक्षर 1982 प्रथम संस्करण, प्रकाषक गांधी नगर दिल्ली पृष्ट संख्या 35

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How to Cite

डॉ. आशा रानी. (2025). सारस्वत मोहन मनीषी जी के काव्य में मानवीय संवेदना और सामाजिक मूल्यों का अध्ययन. International Journal of Engineering Science & Humanities, 15(2), 209–217. Retrieved from https://www.ijesh.com/j/article/view/543

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