अनुसूचित जाति में धार्मिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तन एक अध्ययन
Keywords:
धार्मिक परिवर्तन, सांस्कृतिक रूपांतरण, अनुसूचित जातियाँ, सामाजिक गतिशीलता, पहचान पुनर्निर्माणAbstract
यह अध्ययन अनुसूचित जातियों में हो रहे धार्मिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तनों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसमें आधुनिकता, शिक्षा, शहरीकरण, सामाजिक गतिशीलता और राजनीतिक चेतना जैसे कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पारंपरिक धार्मिक आस्थाएँ, जो लंबे समय से सामाजिक संरचना और सामुदायिक पहचान का आधार रही हैं, धीरे-धीरे परिवर्तित हो रही हैं। इन समुदायों में धार्मिक रूपांतरण, नव-बौद्ध आंदोलन, सुधारवादी प्रवृत्तियाँ तथा जातिवार सामाजिक असमानताओं के विरुद्ध प्रतिरोधी सांस्कृतिक अभिव्यक्तियाँ प्रमुख रूप से उभर रही हैं। अध्ययन यह भी दर्शाता है कि सांस्कृतिक प्रथाओं में विविधता, सामाजिक अनुष्ठानों में परिवर्तन, लोक परंपराओं का पुनर्गठन और आत्मसम्मान की भावना के विस्तार ने अनुसूचित जातियों की सामुदायिक चेतना को एक नई दिशा दी है। मीडिया, शिक्षा और राजनीति ने न केवल धार्मिक व्यवहारों को प्रभावित किया है, बल्कि सांस्कृतिक प्रतीकों और सामाजिक पहचान के पुनर्निर्माण को भी गति दी है। शोध से पता चलता है कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तन केवल आध्यात्मिक स्तर पर नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण और समानता की आकांक्षा से भी गहराई से जुड़े हैं। समग्र रूप से यह अध्ययन संकेत करता है कि धार्मिक व सांस्कृतिक परिवर्तन अनुसूचित जातियों की सामाजिक गतिशीलता का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभर रहे हैं, जो भारतीय समाज में लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक समावेशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहायक है।
References
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