लोकगीतों की सांस्कृतिक विरासत और संरक्षण के आधुनिक दृष्टिकोण

Authors

  • Akat Rohan Vilasrao, Dr. Rajendra Baviskar

Keywords:

लोकगीत, सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक प्रासंगिकता, संरक्षण, मौखिक परंपरा

Abstract

हिंदी लोकगीत भारतीय सांस्कृतिक विरासत का एक महत्त्वपूर्ण आधार हैं, जो समाज के ऐतिहासिक अनुभवों, भावनात्मक अभिव्यक्तियों और सामुदायिक जीवन के विविध रंगों को संरक्षित करते हैं। ये गीत न केवल मौखिक परंपरा का हिस्सा हैं, बल्कि ग्रामीण सामाजिक संरचना, उत्सवों, अनुष्ठानों और श्रमजीवन की सहज अभिव्यक्ति भी प्रस्तुत करते हैं। समय के साथ आधुनिकता, तकनीकी प्रगति और वैश्वीकरण ने लोकगीतों के स्वरूप, लोकप्रियता और पीढ़ियों के बीच इनके प्रसार पर स्पष्ट प्रभाव डाला है। इससे जहाँ इनकी सांस्कृतिक प्रासंगिकता पुनर्परिभाषित हुई है, वहीं इनके विलुप्त होने का खतरा भी बढ़ा है। इस अध्ययन का उद्देश्य हिंदी लोकगीतों की परंपरा, सामाजिक महत्व और सांस्कृतिक परिचय में उनकी भूमिका का विश्लेषण करना है, साथ ही संरक्षण हेतु अपनाई जा रही समकालीन रणनीतियों का मूल्यांकन करना भी है। शोध से ज्ञात होता है कि डिजिटल आर्काइव, ऑडियो–वीडियो रिकॉर्डिंग, शैक्षणिक संस्थानों की पहल, सांस्कृतिक महोत्सवों का आयोजन तथा सरकारी–गैर सरकारी प्रयास लोकगीतों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सामुदायिक भागीदारी, लोककलाकारों को आर्थिक–सामाजिक प्रोत्साहन और शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में लोकसंगीत का समावेश इन गीतों को पुनर्जीवित करने की संभावनाएँ बढ़ाता है। अतः यह अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संतुलित समागम हिंदी लोकगीतों को भविष्य में सुरक्षित, सशक्त और जीवंत बनाए रखने में सहायक होगा।

References

दत्त, रामनारायण. (2015). भारतीय लोकसंगीत का सांस्कृतिक अध्ययन. नई दिल्ली: लोकभारती प्रकाशन।

शर्मा, कुसुम. (2018). हिंदी लोकगीत और सामाजिक जीवन. वाराणसी: साहित्य भवन।

मिश्र, हरिनारायण. (2014). लोकगीत: स्वरूप, संवेदना और सांस्कृतिक दृष्टि. इलाहाबाद: संवाद प्रकाशन।

तिवारी, माधव. (2019). हिंदी क्षेत्र के लोकगीतों में सांस्कृतिक बिंब. लखनऊ: संस्कृति प्रकाशन।

पांडेय, शैलजा. (2017). ग्रामीण लोकपरंपराएँ और हिंदी लोकगीत. भारतीय लोकसाहित्य जर्नल, 12(2), 44–58।

सिंह, ममता. (2020). डिजिटल युग में लोकगीत संरक्षण: चुनौतियाँ और संभावनाएँ. भारतीय संगीत शोध पत्रिका, 15(3), 66–78।

जोशी, राजीव. (2013). सामाजिक एकीकरण में लोकसंगीत की भूमिका. भारतीय सामाजिक नृविज्ञान समीक्षा, 7(4), 44–59।

चौहान, अर्चना. (2019). आदिवासी एवं ग्रामीण लोकपरंपराओं का दस्तावेज़ीकरण: संरक्षण की दिशा में पहल. लोकधरोहर अध्ययन, 11(2), 29–41।

यादव, प्रीति. (2018). भोजपुरी लोकगीतों में सांस्कृतिक पहचान. लोकसंस्कृति शोध पत्रिका, 5(1), 87–98।

शर्मा, देवेश. (2016). उत्तर भारत के लोकगीतों में सामाजिक संरचना का चित्रण. लोकवार्ता, 9(1), 101–118।

गुप्ता, संजय. (2021). भारतीय लोकसंगीत में मौखिक परंपरा की भूमिका. लोकसांस्कृतिक विमर्श, 6(2), 55–71।

शुक्ला, नीलम. (2022). समुदाय आधारित संरक्षण मॉडल और भारतीय लोकगीत. एशियाई सांस्कृतिक अध्ययन पत्रिका, 14(3), 72–85।

Downloads

How to Cite

Akat Rohan Vilasrao, Dr. Rajendra Baviskar. (2024). लोकगीतों की सांस्कृतिक विरासत और संरक्षण के आधुनिक दृष्टिकोण. International Journal of Engineering Science & Humanities, 14(4), 81–93. Retrieved from https://www.ijesh.com/j/article/view/337

Similar Articles

1 2 3 4 5 6 > >> 

You may also start an advanced similarity search for this article.