लोकतंत्र की अवधारणा और समकालीन परिप्रेक्ष्य

Authors

  • Dr. Vansh Gopal

Keywords:

लोकतंत्र, राजनीतिक समानता, नागरिक सहभागिता, मानवाधिकार, समकालीन चुनौतियाँ

Abstract

लोकतंत्र आधुनिक राजनीतिक व्यवस्थाओं का सबसे व्यापक और स्वीकार्य स्वरूप है, जिसकी मूल भावना “जनता द्वारा, जनता के लिए, और जनता की सरकार” में निहित है। लोकतंत्र न केवल शासन की एक पद्धति है, बल्कि यह एक सामाजिक, आर्थिक और नैतिक दर्शन भी है, जो समानता, स्वतंत्रता और न्याय जैसे मूल्यों पर आधारित है। वर्तमान वैश्विक संदर्भ में लोकतंत्र की अवधारणा निरंतर विकसित हो रही है, जिसमें पारंपरिक प्रतिनिधिक लोकतंत्र के साथ-साथ सहभागी, विमर्शात्मक और डिजिटल लोकतंत्र जैसे नए रूप उभर रहे हैं। इस शोध-पत्र में लोकतंत्र की अवधारणा, उसके प्रमुख तत्व, ऐतिहासिक विकास, तथा समकालीन चुनौतियों का विश्लेषण किया गया है। साथ ही, यह अध्ययन वैश्वीकरण, तकनीकी प्रगति, सामाजिक असमानता और राजनीतिक ध्रुवीकरण जैसे कारकों के प्रभाव का भी परीक्षण करता है। अंततः, यह शोध लोकतंत्र के भविष्य और उसकी सुदृढ़ता के लिए आवश्यक उपायों पर प्रकाश डालता है।

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How to Cite

Dr. Vansh Gopal. (2015). लोकतंत्र की अवधारणा और समकालीन परिप्रेक्ष्य. International Journal of Engineering Science & Humanities, 5(2), 39–49. Retrieved from https://www.ijesh.com/j/article/view/779

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