21वीं सदी में भारतीय लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियाँ : एक विवेचना

Authors

  • वंश गोपाल

Keywords:

लोकतंत्र, आर्थिक असंतुलन, चुनौती ।

Abstract

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से लोकतंत्र को भरपूर्ण प्रोत्साहन मिला तथा स्वतंत्रता के उपरांत भारत ने लोकतंत्र आत्मक गणराज्य स्थापित कर 72 वर्षों में अनेक सफलताएं प्राप्त की, भारतीय प्रजातंत्र आरंभ में निम्र्तर साक्षरता विस्तार गरीबी, शिक्षा, बेरोजगारी आदि के साथ संघर्ष करते हुए विकास के पथ पर अग्रसर हुआ भारतीय प्रजातंत्र ने विश्व की कुल आबादी की  16, 15% आबादी को संभाल रखा है, जबकि हमारे साथ आजाद हुए दूसरे देशों को लंबे समय तक सैनिक शासन या तानाशाही झेलनी पड़ी यह भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का ही पर्याय है, राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से आज भारत विश्व का सबसे बड़ा एवं सफल लोकतंत्र तथा विश्व की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था है विश्व के अनेक कंपनियों का अधिग्रहण भारतीयों द्वारा किया जा चुका है, आज हम सूचना एवं प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ अंतरिक्ष के क्षेत्र में हम अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं भारतीय समाज में राजनीतिक सहभागिता विकास आधुनिकीकरण तथा आर्थिक विकास की दर में वृद्धि हुई है जनता का मतदान व्यवहार परिपक्व हुआ है।

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How to Cite

वंश गोपाल. (2023). 21वीं सदी में भारतीय लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियाँ : एक विवेचना. International Journal of Engineering Science & Humanities, 13(4), 85–88. Retrieved from https://www.ijesh.com/j/article/view/731

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