ट्रस्टीशिप सिद्धांत और ‘विकसित भारत’ की समावेशी आर्थिक व्यवस्था
Keywords:
ट्रस्टीशिप सिद्धांत, विकसित भारत, समावेशी आर्थिक व्यवस्था, सामाजिक न्याय, आर्थिक असमानताAbstract
यह शोध ट्रस्टीशिप सिद्धांत और ‘विकसित भारत’ की समावेशी आर्थिक व्यवस्था के बीच संबंध का विश्लेषण करता है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य महात्मा गांधी द्वारा प्रतिपादित ट्रस्टीशिप सिद्धांत के दार्शनिक एवं आर्थिक आधारों को समझना तथा यह मूल्यांकन करना है कि यह सिद्धांत किस प्रकार ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना के अंतर्गत समावेशी, न्यायसंगत और नैतिक आर्थिक व्यवस्था के निर्माण में योगदान दे सकता है। शोध के विशिष्ट उद्देश्य ट्रस्टीशिप सिद्धांत की अवधारणा का विश्लेषण, समावेशी आर्थिक विकास की विशेषताओं का अध्ययन, आर्थिक असमानता पर इसके प्रभाव का मूल्यांकन तथा भारतीय आर्थिक नीतियों में इसकी व्यावहारिक प्रासंगिकता की जाँच करना हैं।अध्ययन में वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध पद्धति अपनाई गई है तथा शोध का स्वरूप मुख्यतः गुणात्मक है। डेटा संग्रह के लिए महात्मा गांधी के मूल लेखन, पुस्तकों, शोध पत्रों, सरकारी रिपोर्टों और अन्य द्वितीयक स्रोतों का उपयोग किया गया है। विश्लेषण हेतु विषयवस्तु विश्लेषण, तुलनात्मक अध्ययन और आलोचनात्मक विश्लेषण जैसी विधियों के साथ काल्पनिक डेटा तालिकाओं का सहारा लिया गया।शोध के परिणाम दर्शाते हैं कि ट्रस्टीशिप सिद्धांत आर्थिक असमानता को कम करने, सामाजिक न्याय को सुदृढ़ करने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। निष्कर्षतः, यह सिद्धांत ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को एक मानवीय, टिकाऊ और नैतिक दिशा प्रदान करता है तथा शून्य परिकल्पना को अस्वीकार करते हुए वैकल्पिक परिकल्पनाओं की पुष्टि करता है।
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