पं. दीनदयाल उपाध्याय और भारतीय लोक

Authors

  • संजय कुमार, डॉ. शशिकला शामलाल प्रधि

Keywords:

पं. दीनदयाल उपाध्याय, भारतीय लोक, एकात्म मानववाद, अंत्योदय, ग्राम-स्वावलंबन, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद।

Abstract

प्रस्तुत शोध-पत्र पं. दीनदयाल उपाध्याय के वैचारिक चिंतन का अध्ययन भारतीय लोक की अवधारणा के परिप्रेक्ष्य में करता है। भारतीय समाज में 'लोक' सामूहिक परंपरा, सामुदायिक चेतना और जीवन-मूल्यों का वाहक रहा है, और दीनदयाल उपाध्याय का सम्पूर्ण चिंतन इसी लोक-भावना से गहराई से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। अध्ययन में एकात्म मानववाद, ग्राम-केंद्रित आर्थिक दृष्टिकोण, अंत्योदय, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद तथा लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण जैसे विषयों की समीक्षा प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों के आधार पर की गई है। विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि दीनदयाल जी ने पाश्चात्य व्यक्तिवाद तथा साम्यवाद के विकल्प के रूप में भारतीय लोकजीवन में निहित समन्वयवादी दृष्टि को अपने वैचारिक प्रतिपादनों का आधार बनाया। शोध यह भी रेखांकित करता है कि आत्मनिर्भर भारत, वोकल फॉर लोकल तथा सामाजिक समावेशन जैसी समकालीन नीतिगत पहलों में दीनदयाल जी के विचारों की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। अंततः यह अध्ययन दीनदयाल उपाध्याय और भारतीय लोक के मध्य के वैचारिक संबंध को रेखांकित करते हुए भविष्य के शोध हेतु दिशा भी प्रस्तुत करता है।

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How to Cite

संजय कुमार, डॉ. शशिकला शामलाल प्रधि. (2026). पं. दीनदयाल उपाध्याय और भारतीय लोक. International Journal of Engineering Science & Humanities, 16(2), 1322–1330. Retrieved from https://www.ijesh.com/j/article/view/1080

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