स्वामी विवेकानंद के नव-वेदांत दर्शन एवं धार्मिक विचारों की वर्तमान शिक्षा में प्रासंगिकता
Keywords:
प्रतिपादन, आध्यात्मिक, चारित्रिक, यथार्थता, मुकुटमणि, दृष्टिगोचर।Abstract
सत्य, अहिंसा, दया, अपरिग्रह, एकता, प्रेम, सहानुभूति तथा तप आदि ऐसे जीवन मूल्य हैं जो भारतीय शिक्षा को सांस्कृतिक विरासत में प्राप्त हुए हैं। स्वामी विवेकानन्द ने इन सबको जीवन मूल्यों के रूप में ग्रहण कर जिस शिक्षा दर्शन का प्रतिपादन किया है वह भारतीय शिक्षा दर्शन की अमूल्य निधि तथा मुकुटमणि है। विश्व के किसी भी शैक्षिक दर्शन में इस प्रकार की एकता दृष्टिगोचर नहीं होती है। फलस्वरूप अन्य किसी भी दर्शन में यह क्षमता नहीं है कि व्यक्ति के व्यक्तिगत सामाजिक, आर्थिक, आध्यात्मिक, नैतिक, चारित्रिक आदि विकास को इतनी यथार्थता से सुनिश्चित कर सके।
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