बिहार में बाढ़ का पर्यावरणीय इतिहास: कोसी नदी क्षेत्र में औपनिवेशिक जल-नीति, भू-परिवर्तन और सामाजिक प्रभाव (1850-1950)

Authors

  • सिकन्दर कुमार, डॉ. थल्लापल्ली मनोहर

Keywords:

कोसी नदी, पर्यावरणीय इतिहास, औपनिवेशिक जल-नीति, तटबन्ध, बाढ़, भू-परिवर्तन, जातिगत संवेदनशीलता, बिहार

Abstract

बिहार का पर्यावरणीय इतिहास बाढ़, नदी-व्यवहार और मानवीय हस्तक्षेप के जटिल अन्तर्सम्बन्धों की कहानी है। प्रस्तुत शोधपत्र कोसी नदी क्षेत्र में औपनिवेशिक काल (1850-1950) के दौरान ब्रिटिश जल-नीति, तटबन्ध निर्माण, सिंचाई परियोजनाओं और भू-राजस्व व्यवस्था के पर्यावरणीय एवं सामाजिक परिणामों का दीर्घकालिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह अध्ययन पर्यावरणीय इतिहास (Environmental History), राजनीतिक पारिस्थितिकी (Political Ecology) और निम्नवर्गीय अध्ययन (Subaltern Studies) के सैद्धान्तिक ढाँचे पर आधारित है। शोध में पाया गया कि कोसी नदी ने 1736 से 2008 के बीच लगभग 115 किलोमीटर पश्चिम की ओर अपना मार्ग बदला, जिसमें औपनिवेशिक काल (1858-1947) में लगभग 55 किलोमीटर का स्थानान्तरण हुआ। ब्रिटिश तटबन्ध नीति ने बाढ़ को नियन्त्रित करने के बजाय उसकी तीव्रता और आवृत्ति में वृद्धि की — तटबन्ध-पूर्व काल (1850-1890) में प्रति दशक औसतन 2-3 बड़ी बाढ़ आती थी, जो तटबन्ध-पश्चात् काल (1900-1950) में बढ़कर 6-8 हो गयी। भू-उपयोग विश्लेषण से ज्ञात होता है कि 1850 से 1950 के बीच कोसी क्षेत्र में वन आवरण 35% से घटकर 12% हो गया, जलमग्न क्षेत्र 5% से बढ़कर 18% हो गया, और चौर-आर्द्रभूमि 18% से सिमटकर 6% रह गयी। जातिगत विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि बाढ़ का सर्वाधिक विनाशकारी प्रभाव दलित (मुसहर, दुसाध) और आदिवासी (सन्थाल, थारू) समुदायों पर पड़ा, जिनके पास न भूमि-स्वामित्व था, न तटबन्ध तक पहुँच, और न ही राहत-वितरण में उचित हिस्सेदारी। प्रस्तुत शोध औपनिवेशिक अभिलेखों (जिला गज़ेटियर, भू-राजस्व प्रतिवेदन, सिंचाई विभाग रिकॉर्ड) और मौखिक इतिहास स्रोतों के विश्लेषण पर आधारित है।

References

आर. डी’सूज़ा, “बाढ़ पर नियन्त्रण: ब्रिटिश भारत में नदी, राज्य और समाज,” ओरिएण्ट लॉन्गमैन, नई दिल्ली, 2006।

आर. के. सिंह, “बिहार का पर्यावरणीय इतिहास: नदी, बाढ़ और समाज,” वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, 2012।

एम. गडगिल और आर. गुहा, “भारत का पर्यावरणीय इतिहास (यह उजड़ा हुआ देश),” ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, नई दिल्ली, 1992।

आर. पीट और एम. वॉट्स, “राजनीतिक पारिस्थितिकी: मुक्ति और विकास,” रूटलेज, लन्दन, 2004।

के. एल. राव, “भारत की नदी जल सम्पदा,” ओरिएण्ट लॉन्गमैन, नई दिल्ली, 1979।

वी. एस. खण्डेलवाल, “कोसी नदी: भू-आकृतिक अध्ययन,” भारतीय भूगोल शोध पत्रिका, खं. 28, अं. 2, पृ. 112-128, 1998।

बिहार सिंचाई विभाग, “कोसी तटबन्ध और बाढ़ नियन्त्रण: शताब्दी प्रतिवेदन (1850-1950),” पटना, 1955।

एस. एन. झा, “उत्तर बिहार में बाढ़ का इतिहास और वर्तमान,” बिहार हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, पटना, 2001।

ए. के. गुप्ता, “कोसी क्षेत्र में भू-उपयोग परिवर्तन: एक ऐतिहासिक विश्लेषण (1850-1950),” भारतीय इतिहास अनुसन्धान परिषद् पत्रिका, खं. 35, अं. 1, पृ. 78-95, 2010।

पी. के. सिन्हा, “कोसी क्षेत्र की आर्द्रभूमि: विनाश का इतिहास,” पर्यावरण एवं विकास, खं. 12, अं. 3, पृ. 45-62, 2008।

एन. के. दिनकर, “बिहार में बाढ़ और सामाजिक असमानता: एक ऐतिहासिक दृष्टिकोण,” सामाजिक विज्ञान शोध पत्रिका, खं. 18, अं. 2, पृ. 134-152, 2005।

बी. के. प्रसाद, “कोसी क्षेत्र में दलित समुदाय और बाढ़: औपनिवेशिक काल का अध्ययन,” दलित अध्ययन, खं. 8, अं. 1, पृ. 56-72, 2009।

आर. गुहा, “पर्यावरणीय इतिहास की पद्धति: भारतीय सन्दर्भ,” इतिहास शोध, खं. 22, अं. 1, पृ. 15-32, 2002।

पी. के. शुक्ला, “ऐतिहासिक शोध पद्धति: अभिलेखीय और मौखिक स्रोत,” ग्रन्थ शिल्पी, नई दिल्ली, 2007।

एस. के. मिश्रा, “बिहार की नदियाँ: इतिहास, भूगोल और समस्याएँ,” किताब महल, पटना, 2003।

आर. ग्रोव, “हरित साम्राज्यवाद: औपनिवेशिक विस्तार और पर्यावरण,” कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, 1995।

डी. के. मिश्र, “बाँधो नहीं नदी को: बिहार की बाढ़ समस्या और तटबन्ध,” वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, 2008।

डी. के. मिश्र, “कोसी महाबाढ़ 2008: तटबन्ध-दृष्टिकोण की विफलता,” आर्थिक एवं राजनीतिक साप्ताहिक, खं. 43, अं. 46, पृ. 47-52, 2008।

आर. सिन्हा, “कोसी नदी: भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ और बाढ़ खतरा,” भारतीय भू-विज्ञान पत्रिका, खं. 72, अं. 4, पृ. 325-342, 2008।

एम. एस. श्रीवास्तव, “उत्तर बिहार की नदी-प्रणालियाँ: ऐतिहासिक भू-आकृतिक अध्ययन,” भू-विज्ञान अनुसन्धान, खं. 15, अं. 2, पृ. 89-105, 1996।

आर. के. वर्मा, “कोसी क्षेत्र में पारम्परिक बाढ़-प्रबन्धन: लोक-ज्ञान का अध्ययन,” लोक संस्कृति, खं. 10, अं. 2, पृ. 34-48, 2007।

एस. पी. सिंह, “उत्तर बिहार की चौर-संस्कृति: मत्स्य-पालन और बाढ़ अनुकूलन,” ग्रामीण अध्ययन, खं. 14, अं. 1, पृ. 67-82, 2004।

पी. रॉबिन्स, “राजनीतिक पारिस्थितिकी: एक आलोचनात्मक परिचय,” ब्लैकवेल, ऑक्सफ़ोर्ड, 2004।

आर. गुहा, “निम्नवर्गीय अध्ययन और पर्यावरणीय इतिहास,” इतिहास एवं सिद्धान्त, खं. 38, अं. 1, पृ. 189-208, 1999।

ए. के. चौधरी, “बिहार में जाति, भूमि और बाढ़: एक सामाजिक-ऐतिहासिक विश्लेषण,” समाजशास्त्र बुलेटिन, खं. 52, अं. 2, पृ. 178-195, 2003।

एल. एस. एस. ओ’मैली, “बंगाल डिस्ट्रिक्ट गज़ेटियर: पूर्णिया,” कलकत्ता, 1911।

एच. आर. नेविल, “बंगाल डिस्ट्रिक्ट गज़ेटियर: दरभंगा,” कलकत्ता, 1907।

जे. एच. केर, “फ़ाइनल रिपोर्ट ऑन सर्वे एण्ड सेटलमेण्ट: पूर्णिया (1885-1895),” कलकत्ता, 1897।

डब्ल्यू. डब्ल्यू. हण्टर, “बंगाल का सांख्यिकीय विवरण: सहरसा और पूर्णिया,” कलकत्ता, 1877।

बिहार सिंचाई विभाग, “वार्षिक प्रशासनिक प्रतिवेदन (1880-1950),” पटना।

बिहार विधानसभा, “बिहार विधान परिषद् कार्यवाही: बाढ़ पर बहसें (1937-1950),” पटना।

एस. के. दास, “मौखिक इतिहास और भारतीय इतिहास-लेखन,” मनोहर, नई दिल्ली, 2010।

पी. थॉम्पसन, “मौखिक इतिहास: अतीत की आवाज़ें,” ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 2000।

जे. टॉश, “इतिहास की खोज: आधुनिक ऐतिहासिक अध्ययन के लक्ष्य, पद्धतियाँ और नए अनुसन्धान,” पियर्सन, लन्दन, 2010।

डब्ल्यू. विलकॉक्स, “बंगाल प्रान्त में सिंचाई: तटबन्ध और बाढ़ नियन्त्रण,” कलकत्ता, 1905।

एस. रवि राजन, “औपनिवेशिक प्रकृति: ब्रिटिश राज में वन, नदी और बाढ़ नियन्त्रण,” ओरिएण्ट ब्लैकस्वान, नई दिल्ली, 2006।

ए. के. सेन, “तटबन्ध और जलमग्नता: उत्तर बिहार में एक अध्ययन,” भारतीय जल संसाधन, खं. 20, अं. 3, पृ. 156-172, 2000।

जी. के. त्रिपाठी, “बिहार में अकाल और महामारी: औपनिवेशिक काल (1860-1943),” इतिहास शोध, खं. 25, अं. 2, पृ. 89-108, 2006।

एम. गडगिल और आर. गुहा, “भारत में पारिस्थितिकी और समता: जन-आन्दोलनों का इतिहास,” ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, नई दिल्ली, 1995।

जे. आइव्स और बी. मेसर्ली, “हिमालयी दुविधा: पर्वतीय पर्यावरण और विकास,” रूटलेज, लन्दन, 1989।

बी. एन. सिंह, “उत्तर बिहार की चौर-व्यवस्था और मत्स्य-पालन,” बिहार शोध पत्रिका, खं. 18, अं. 1, पृ. 45-58, 2002।

एस. हेनिंगम, “बिहार में ज़मींदारी व्यवस्था और ग्रामीण समाज (1870-1920),” इण्डियन इकनॉमिक एण्ड सोशल हिस्ट्री रिव्यू, खं. 20, अं. 4, पृ. 407-426, 1983।

के. एस. सिंह, “बिहार के आदिवासी: इतिहास, संस्कृति और विस्थापन,” मनोहर, नई दिल्ली, 1985।

बी. बी. चौधरी, “औपनिवेशिक बिहार में भू-राजस्व, भूमि-हस्तान्तरण और कृषि संकट,” इण्डियन हिस्ट्री कांग्रेस कार्यवाही, खं. 45, पृ. 338-352, 1984।

एस. के. पाण्डेय, “कोसी क्षेत्र में बाढ़ और महामारी: एक ऐतिहासिक सर्वेक्षण (1870-1950),” चिकित्सा इतिहास, खं. 8, अं. 2, पृ. 112-128, 2005।

Downloads

How to Cite

सिकन्दर कुमार, डॉ. थल्लापल्ली मनोहर. (2019). बिहार में बाढ़ का पर्यावरणीय इतिहास: कोसी नदी क्षेत्र में औपनिवेशिक जल-नीति, भू-परिवर्तन और सामाजिक प्रभाव (1850-1950). International Journal of Engineering Science & Humanities, 9(3), 82–95. Retrieved from https://www.ijesh.com/j/article/view/700

Similar Articles

<< < 1 2 

You may also start an advanced similarity search for this article.