पर्यावरण हितैषी व्यवहार की सामाजिक-मनोवैज्ञानिक व्याख्या: व्यक्तिगत एवं संदर्भगत कारकों का एकीकृत विश्लेषण

Authors

  • नीरज कुमार सिंह, डॉ. ललित वर्मा

Keywords:

पर्यावरण हितैषी व्यवहार, सामाजिक मनोविज्ञान, पर्यावरणीय अभिवृत्ति, आत्म-पहचान, नियोजित व्यवहार सिद्धान्त, बिहार, व्यवहार परिवर्तन, पर्यावरण चेतना

Abstract

पर्यावरणीय संकट के गम्भीर होते जाने के साथ यह प्रश्न अत्यन्त महत्वपूर्ण हो गया है कि व्यक्ति पर्यावरण हितैषी व्यवहार (pro-environmental behavior, PEB) क्यों अपनाते हैं या क्यों नहीं अपनाते। यह शोधपत्र पर्यावरण हितैषी व्यवहार की सामाजिक-मनोवैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करता है, जिसमें व्यक्तिगत कारकों (पर्यावरणीय ज्ञान, पर्यावरणीय अभिवृत्ति, व्यक्तिगत मूल्य, पर्यावरणीय आत्म-पहचान) और संदर्भगत कारकों (व्यक्तिपरक मानदण्ड, प्रत्यक्षित व्यवहार नियन्त्रण, स्थान-लगाव, प्रत्यक्षित जोखिम) का एकीकृत विश्लेषण किया गया है [1], [2]। बिहार के नगरीय, अर्ध-नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों से 850 प्रतिभागियों (18-65 वर्ष) का सर्वेक्षण मानकीकृत प्रश्नावलियों द्वारा किया गया। संरचनात्मक समीकरण मॉडलिंग (SEM) विश्लेषण में पाया गया कि पर्यावरणीय आत्म-पहचान (β=0.38), जैवमण्डलीय मूल्य (β=0.35) और पर्यावरणीय अभिवृत्ति (β=0.32) PEB के सबसे सशक्त भविष्यवक्ता हैं। व्यवहारिक इरादे (behavioral intention) ने मूल्यों और PEB के बीच आंशिक मध्यस्थता (partial mediation) की भूमिका निभाई। लिंग, आयु और शिक्षा स्तर ने नियामक (moderating) प्रभाव दिखाया—महिलाओं, वृद्धतर आयु वर्ग और उच्च शिक्षित व्यक्तियों में PEB स्कोर सार्थक रूप से अधिक पाया गया [3], [4]। नगर-ग्राम तुलना में, नगरीय प्रतिभागियों ने ऊर्जा संरक्षण और हरित परिवहन में अधिक PEB दिखाया, जबकि ग्रामीण प्रतिभागियों ने जल संरक्षण में। शोध यह प्रतिपादित करता है कि प्रभावी पर्यावरण व्यवहार हस्तक्षेपों को व्यक्तिगत मनोवैज्ञानिक कारकों और सामाजिक-संदर्भगत परिस्थितियों दोनों को सम्बोधित करना आवश्यक है।

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नीरज कुमार सिंह, डॉ. ललित वर्मा. (2019). पर्यावरण हितैषी व्यवहार की सामाजिक-मनोवैज्ञानिक व्याख्या: व्यक्तिगत एवं संदर्भगत कारकों का एकीकृत विश्लेषण. International Journal of Engineering Science & Humanities, 9(2), 100–112. Retrieved from https://www.ijesh.com/j/article/view/665

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