भारतीय दर्शन की परम्परा: बौद्ध एवं वेदान्त दर्शन का सैद्धान्तिक एवं साहित्यिक विश्लेषण
Keywords:
भारतीय दर्शन, बौद्ध दर्शन, वेदान्त दर्शन, सैद्धान्तिक आधार, साहित्य समीक्षा।Abstract
भारतीय दर्शन विश्व की सर्वाधिक प्राचीन एवं समृद्ध दार्शनिक परम्पराओं में से एक है, जिसने मानव जीवन, ज्ञान, सत्य, आत्मा, ब्रह्म, नैतिकता तथा मोक्ष जैसे मूलभूत प्रश्नों पर गहन चिंतन प्रस्तुत किया है। भारतीय दार्शनिक परम्परा में बौद्ध एवं वेदान्त दर्शन दो ऐसे प्रमुख विचार-प्रवाह हैं, जिन्होंने भारतीय एवं वैश्विक बौद्धिक परम्परा को गहराई से प्रभावित किया है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य भारतीय दर्शन की परम्परा के संदर्भ में बौद्ध एवं वेदान्त दर्शन के सैद्धान्तिक आधारों का विश्लेषण तथा उपलब्ध साहित्य का समीक्षात्मक अध्ययन करना है। यह शोध पूर्णतः द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है, जिसमें प्राचीन दार्शनिक ग्रंथों, उपनिषदों, वेदान्त साहित्य, त्रिपिटक, शोध-पत्रों, पुस्तकों तथा प्रतिष्ठित विद्वानों के प्रकाशित अध्ययनों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि जहाँ बौद्ध दर्शन अनित्य, अनात्म, प्रतीत्यसमुत्पाद तथा मध्यम मार्ग के सिद्धान्तों के माध्यम से दुःख-निवारण एवं निर्वाण की अवधारणा प्रस्तुत करता है, वहीं वेदान्त दर्शन ब्रह्म, आत्मा, अद्वैत, मोक्ष एवं परम सत्य के सिद्धान्तों के आधार पर आध्यात्मिक एकत्व एवं आत्मसाक्षात्कार का प्रतिपादन करता है। दोनों दर्शन अपने-अपने दृष्टिकोण में भिन्न होने के बावजूद नैतिक जीवन, आत्मानुशासन, करुणा, ज्ञान तथा मानव कल्याण को समान रूप से महत्व प्रदान करते हैं। साहित्य समीक्षा से यह भी ज्ञात होता है कि आधुनिक युग में बौद्ध एवं वेदान्त दर्शन केवल धार्मिक या आध्यात्मिक विमर्श तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, मनोविज्ञान, नैतिक दर्शन, पर्यावरणीय चिंतन, वैश्विक शांति तथा मानवीय मूल्यों के विकास में भी इनकी प्रासंगिकता निरंतर बढ़ रही है। निष्कर्षतः यह अध्ययन प्रतिपादित करता है कि भारतीय दार्शनिक परम्परा में बौद्ध एवं वेदान्त दर्शन के सैद्धान्तिक आधारों का समन्वित अध्ययन भारतीय ज्ञान परम्परा की व्यापकता, गहनता तथा समकालीन उपयोगिता को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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