पतंजलि योगसूत्र एवं हठयोग प्रदीपिका में योग साधना का स्वरूप: एक तुलनात्मक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन

Authors

  • Amarpal,Dr. Ravinder Kumar Verma

Keywords:

पतंजलि योगसूत्र, हठयोग प्रदीपिका, योग साधना, तुलनात्मक अध्ययन, राजयोग।

Abstract

भारतीय दार्शनिक चिंतन एवं आध्यात्मिक चेतना के इतिहास में योग साधना सर्वप्रमुख विधा के रूप में प्रतिष्ठित रही है। वैदिक काल से लेकर आधुनिक युग तक आत्म-साक्षात्कार, समाधि, मोक्ष अथवा कैवल्य की प्राप्ति हेतु विभिन्न साधना पद्धतियों का विकास हुआ है। इन पद्धतियों में महर्षि पतंजलि द्वारा प्रणीत 'पतंजलि योगसूत्र' एवं स्वामी स्वात्माराम द्वारा रचित 'हठयोग प्रदीपिका' को आधारभूत स्तंभ माना जाता है। पतंजलि योगसूत्र मुख्य रूप से राजयोग अथवा दार्शनिक ज्ञान-ध्यान प्रधान मार्ग का निरूपण करता है, जहाँ चित्त की चंचलता को समाप्त कर 'चित्तवृत्तिनिरोधः' को मुख्य साध्य स्वीकार किया गया है। इसके विपरीत, हठयोग प्रदीपिका शारीरिक शुद्धि, नाड़ी शोधन, प्राण वायु के आयाम तथा विभिन्न शारीरिक मुद्राओं के अभ्यास द्वारा चेतना को जाग्रत करने का मार्ग प्रशस्त करती है। प्रस्तुत शोध-पत्र का मुख्य उद्देश्य इन दोनों कालजयी ग्रंथों में वर्णित योग साधना के सैद्धांतिक पक्ष, व्यावहारिक क्रियाविधि, अंगों की व्यवस्था, ईश्वर की महत्ता तथा उनके परम लक्ष्य (कैवल्य बनाम राजयोग) का एक विस्तृत तुलनात्मक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करना है। इस शोध के माध्यम से यह प्रतिपादित करने का प्रयास किया गया है कि दोनों पद्धतियाँ बाह्य रूप से भिन्न प्रतीत होते हुए भी अंततः एक-दूसरे की पूरक हैं, जो साधक को स्थूल से सूक्ष्म चेतना की ओर ले जाती हैं।

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How to Cite

Amarpal,Dr. Ravinder Kumar Verma. (2025). पतंजलि योगसूत्र एवं हठयोग प्रदीपिका में योग साधना का स्वरूप: एक तुलनात्मक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन. International Journal of Engineering Science & Humanities, 15(2), 336–344. Retrieved from https://www.ijesh.com/j/article/view/979

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