महादेवी वर्माः साहित्य, नारीवाद और सामाजिक चेतना की अग्रदूत
Keywords:
नारी चेतना, करुणा, छायावाद, संवेदनशीलता, आत्मानुभूतिAbstract
महादेवी वर्मा (1907.1987) हिंदी छायावादी काव्य की प्रमुख स्तंभ थीं और उन्हें आधुनिक मीरा कहा जाता है। उनकी प्रमुख काव्य रचनाएँ नीहार, रश्मि, नीरजा, संध्यागीत और दीपशिखा हैं, जो आत्मसंवाद, प्रकृति प्रेम और करुणा से ओतप्रोत हैं। उनका गद्य साहित्य भी महत्वपूर्ण है। श्रृंखला की कड़ियाँनारी जागरण का सशक्त दस्तावेज़ है, जबकि अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ और पथ के साथी आत्मकथात्मक संवेदनाओं और सामाजिक मुद्दों को उजागर करते हैं। महादेवी वर्मा शिक्षाविद् और चाँद पत्रिका की संपादक भी रहीं। उन्होंने नारी शिक्षा, स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया। उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया। उनका साहित्य हिंदी भाषा, नारी चेतना और सामाजिक सुधार में अमूल्य योगदान देता है।
References
वर्मा, महादेवी। श्रृंखला की कड़ियाँ राजकमल प्रकाशन, 1942।
वर्मा, महादेवी। अतीत के चलचित्र लोकभारती प्रकाशन, 1956।
वर्मा, महादेवी। स्मृति की रेखाएँ। राजकमल प्रकाशन, 1958।
वर्मा, महादेवी। मेरा परिवारा लोकभारती प्रकाशन, 1972।
वर्मा, महादेवी। नीहार, रश्मि, नीरजा, संध्यागीत और दीपशिखा (काव्य संग्रह)। लोकभारती प्रकाशन।
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