इक्कीसवीं सदी की हिंदी कहानी: उदय प्रकाश एवं अखिलेश के संदर्भ में प्रवृत्तियों का विश्लेषण

Authors

  • Patil Dhanashree Diliprao, Dr. Rajendra Kashinath Baviskar

Keywords:

हिंदी कहानी, समकालीन साहित्य, उदय प्रकाश, अखिलेश, प्रवृत्तियाँ

Abstract

इक्कीसवीं सदी की हिंदी कहानी समकालीन भारतीय समाज के बहुआयामी यथार्थ, सामाजिक अंतर्विरोधों और बदलती सांस्कृतिक संरचनाओं का सशक्त प्रतिनिधित्व करती है। प्रस्तुत अध्ययन में हिंदी कथा-साहित्य की प्रमुख प्रवृत्तियों का विश्लेषण किया गया है, विशेष रूप से उदय प्रकाश एवं अखिलेश की कहानियों के संदर्भ में। वैश्वीकरण, उदारीकरण और बाजारवाद के प्रभाव ने सामाजिक संरचना, मानवीय संबंधों और मूल्य-व्यवस्था में गहरे परिवर्तन उत्पन्न किए हैं, जिनका प्रभाव कथा-साहित्य पर स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। उदय प्रकाश की कहानियाँ हाशिये के समाज, सत्ता-विरोध, पहचान संकट और प्रशासनिक विफलताओं को तीव्र आलोचनात्मक दृष्टि से प्रस्तुत करती हैं, जबकि अखिलेश की रचनाएँ मध्यवर्गीय जीवन की जटिलताओं, सामाजिक विडंबनाओं और संबंधों के विघटन को संवेदनात्मक यथार्थ के साथ अभिव्यक्त करती हैं। दोनों कथाकारों की रचनाओं में यथार्थवाद का एक नया स्वरूप उभरता है, जिसमें बाह्य सामाजिक यथार्थ के साथ-साथ आंतरिक मनोवैज्ञानिक और अस्तित्वगत संघर्ष भी सम्मिलित हैं। यह शोध स्पष्ट करता है कि समकालीन हिंदी कहानी केवल समाज का प्रतिबिंब नहीं है, बल्कि वह सामाजिक चेतना के निर्माण और परिवर्तन का सक्रिय माध्यम भी है। इस प्रकार, उदय प्रकाश और अखिलेश की कहानियाँ इक्कीसवीं सदी के हिंदी कथा-साहित्य को वैचारिक गहराई, सामाजिक प्रतिबद्धता और शिल्पगत नवीनता प्रदान करती हैं।

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How to Cite

Patil Dhanashree Diliprao, Dr. Rajendra Kashinath Baviskar. (2024). इक्कीसवीं सदी की हिंदी कहानी: उदय प्रकाश एवं अखिलेश के संदर्भ में प्रवृत्तियों का विश्लेषण. International Journal of Engineering Science & Humanities, 14(4), 430–438. Retrieved from https://www.ijesh.com/j/article/view/780

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