राग दरबारी: ग्रामीण भारत की सामाजिक-राजनीतिक विसंगतियों का व्यंग्यात्मक विश्लेषण

Authors

  • डॉ. नीरज गुप्ता

Keywords:

राग दरबारी, ग्रामीण समाज, व्यंग्य, राजनीतिक विसंगतियाँ, सामाजिक यथार्थ

Abstract

राग दरबारी, जिसे श्रीलाल शुक्ल ने रचा, हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण व्यंग्यात्मक कृति है जो ग्रामीण भारत की सामाजिक एवं राजनीतिक विसंगतियों को तीक्ष्ण दृष्टि से प्रस्तुत करती है। यह उपन्यास शिवपालगंज नामक काल्पनिक गाँव के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थाओं की विफलता, शिक्षा व्यवस्था की दुर्दशा, भ्रष्टाचार, जातिगत असमानता तथा नैतिक पतन को उजागर करता है। व्यंग्य और हास्य के प्रभावी प्रयोग के माध्यम से लेखक ने यह दर्शाया है कि किस प्रकार सत्ता, स्वार्थ और अवसरवाद ग्रामीण जीवन को प्रभावित करते हैं। यह कृति न केवल सामाजिक यथार्थ का प्रतिबिंब है, बल्कि समकालीन भारतीय समाज की संरचनात्मक समस्याओं पर भी प्रकाश डालती है। इस शोध का उद्देश्य उपन्यास के माध्यम से इन विसंगतियों का विश्लेषण करना तथा इसकी वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिकता को समझना है।

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How to Cite

डॉ. नीरज गुप्ता. (2021). राग दरबारी: ग्रामीण भारत की सामाजिक-राजनीतिक विसंगतियों का व्यंग्यात्मक विश्लेषण. International Journal of Engineering Science & Humanities, 11(4), 110–119. Retrieved from https://www.ijesh.com/j/article/view/743

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