आधुनिक हिंदी कथासाहित्य में स्त्री-चेतना और विमर्श चयनित कथाकारों के संदर्भ में एक समीक्षात्मक अध्ययन

Authors

  • Bahiram Devendra Maganbhai, Dr. Rajendra Bhaviskar

Keywords:

स्त्री-चेतना, स्त्री-विमर्श, पितृसत्ता, अस्मिता, आधुनिक हिंदी कथासाहित्य

Abstract

आधुनिक हिंदी कथासाहित्य में स्त्री-चेतना और स्त्री-विमर्श ने साहित्यिक तथा सामाजिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण परिवर्तन की दिशा को इंगित किया है। प्रस्तुत अध्ययन में मन्नू भंडारी, कृष्णा सोबती, उषा प्रियंवदा तथा मृदुला गर्ग जैसे चयनित कथाकारों की कृतियों के माध्यम से स्त्री-अस्मिता, आत्मचेतना, सामाजिक बंधनों और लैंगिक असमानता का समीक्षात्मक विश्लेषण किया गया है। इन रचनाकारों ने स्त्री को पारंपरिक भूमिकाओं से बाहर निकालकर एक स्वतंत्र और विचारशील व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत किया है, जो पितृसत्तात्मक व्यवस्था को चुनौती देती है। अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि आधुनिक कथा-साहित्य में स्त्री-विमर्श केवल विरोध तक सीमित नहीं, बल्कि समानता, अधिकार और आत्मनिर्णय की स्थापना की दिशा में एक सशक्त अभिव्यक्ति है। इस प्रकार, यह शोध हिंदी साहित्य में स्त्री के बदलते स्वरूप और उसके वैचारिक विकास को समझने का प्रयास करता है।

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How to Cite

Bahiram Devendra Maganbhai, Dr. Rajendra Bhaviskar. (2024). आधुनिक हिंदी कथासाहित्य में स्त्री-चेतना और विमर्श चयनित कथाकारों के संदर्भ में एक समीक्षात्मक अध्ययन. International Journal of Engineering Science & Humanities, 14(4), 456–464. Retrieved from https://www.ijesh.com/j/article/view/849