श्रीमद्भगवद्गीता और तनाव प्रबंधन

Authors

  • डाॅ. सुधा सिंह

Keywords:

श्रीमद्भगवद्गीता, तनाव प्रबंधन, निष्काम कर्म, समत्व योग, ध्यान

Abstract

वर्तमान युग में मानसिक तनाव एक व्यापक समस्या के रूप में उभरकर सामने आया है, जो व्यक्ति के मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करता है। प्रतिस्पर्धात्मक जीवन, असुरक्षा, पारिवारिक दबाव और भविष्य की अनिश्चितता इसके प्रमुख कारण हैं। प्रस्तुत अध्ययन में श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेशों के माध्यम से तनाव प्रबंधन के प्रभावी उपायों का विश्लेषण किया गया है। महाभारत के प्रसंग में अर्जुन की मानसिक स्थिति आधुनिक मनुष्य के तनावपूर्ण जीवन से मेल खाती है, जहाँ व्यक्ति निर्णय लेने में असमर्थ हो जाता है। गीता का निष्काम कर्म सिद्धांत, समत्व योग, आत्मसंयम और ध्यान जैसी अवधारणाएँ मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक सिद्ध होती हैं। यह अध्ययन दर्शाता है कि परिणाम की चिंता छोड़कर कर्म पर ध्यान केंद्रित करने से तनाव में कमी आती है। साथ ही, सकारात्मक सोच, क्रोध पर नियंत्रण तथा आत्मविश्लेषण से मानसिक शांति प्राप्त की जा सकती है। इस प्रकार, गीता के सिद्धांत न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि आधुनिक मनोविज्ञान के अनुरूप भी हैं और तनाव प्रबंधन के लिए एक प्रभावी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

References

श्रीमद्भगवदगीता, 2/7

श्रीमद्भगवदगीता, 2/47

श्रीमद्भगवदगीता, 2/48

श्रीमद्भगवदगीता, 2/66

श्रीमद्भगवदगीता, 2/63

श्रीमद्भगवदगीता, 6/5

श्रीमद्भगवदगीता, 6/26

श्रीमद्भगवदगीता, 18/66

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How to Cite

डाॅ. सुधा सिंह. (2024). श्रीमद्भगवद्गीता और तनाव प्रबंधन. International Journal of Engineering Science & Humanities, 14(1), 234–238. Retrieved from https://www.ijesh.com/j/article/view/823

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