भारत छोड़ो आंदोलन (1942) में महिलाओं की भूमिगत गतिविधियाँ
Keywords:
भारत छोड़ो आंदोलन (1942), महिलाएँ, भूमिगत गतिविधियाँ, अरुणा आसफ़ अली, उषा मेहता, कांग्रेस रेडियो, महिला चेतना, स्वतंत्रता संग्रामAbstract
भारत छोड़ो आंदोलन (1942) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक चरण था, जिसने औपनिवेशिक शासन की नींव को गंभीर रूप से हिला दिया। इस आंदोलन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण, किंतु लंबे समय तक उपेक्षित पक्ष महिलाओं की भूमिगत गतिविधियाँ रही हैं। जब आंदोलन के प्रारंभिक चरण में ही अधिकांश शीर्ष पुरुष नेतृत्व को ब्रिटिश सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया, तब महिलाओं ने संगठन, संचार, रणनीति तथा जन-उत्साह और जन-प्रचार की जिम्मेदारी संभाली। इस शोध-पत्र का उद्देश्य भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महिलाओं द्वारा संचालित भूमिगत नेटवर्क, गुप्त संचार प्रणालियों, रेडियो प्रसारण, पर्चा वितरण, आश्रय व्यवस्था तथा जोखिमपूर्ण संगठनात्मक गतिविधियों का ऐतिहासिक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन करना है। अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि महिलाओं की भूमिगत भूमिका केवल आंदोलन को जीवित रखने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसने भारतीय समाज में महिला चेतना, आत्मनिर्भरता और राजनीतिक सक्रियता के नए आयाम भी विकसित किए। यह शोध महिलाओं की भूमिका को एक सक्रिय ऐतिहासिक शक्ति के रूप में स्थापित करता है, न कि केवल सहायक या प्रतीकात्मक योगदान के रूप में।
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