कमल कुमार के कथा-साहित्य में बिखरते पारिवारिक रिश्ते

Authors

  • हरिस्वरुप
  • डाॅ मीनेश जैन

Keywords:

वात्सल्य भाव, माँ-बेटी, प्रयोगशाला, जिम्मेदारी, पसंदीदा लड़कों, स्वतन्त्रता और अधिकारों

Abstract

समाज की सबसे महत्वपूर्ण इकाई परिवार को ही माना जाता है, जिसमें संपूर्ण परिवार अपने माँ-बाप एवं बच्चों सहित रहता है। परिवार समाज का सबसे छोटा समूह होता है। समाज से ही प्रत्येक व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकताएँ पूरी होती हैं।
‘परिवार‘ शब्द अंग्रेजी शब्द फैमिली (थ्ंउपसल) या रोमन शब्द फेमुलस (थ्ंउनसने) का हिन्दी अनुवाद है जिसका अर्थ नौकर से लिया गया है। रोमन कानून में ये शब्द दासों, स्वामियों तथा नौकरों के लिए प्रयोग में लाया जाता था। परिवार की कुछ परिभाषाएँ समाज वैज्ञानिकों ने इस प्रकार दी है-
मैकाइवर:- ‘‘परिवार बच्चों की उत्पत्ति एवं पालन-पोषण की व्यवस्था करने हेतु पर्याप्त रूप से निश्चित और स्थायी यौन-संबंध से परिभाषित एक समूह है।‘‘(1)
बर्गेस एवं लॉक:- ‘‘परिवार उन व्यक्तियों का समूह है जो विवाह, रक्त या गोद लेने के बंधन से जुड़े हैं, एक गृहस्थी का निर्माण करते हैं। पति-पत्नी, माता-पिता, पुत्र और पुत्री, भाई और बहन, अपने-अपने क्रमशः सामाजिक कार्यों, अन्तःक्रिया एवं अंतःसंचार करते हैं तथा एक सामान्य संस्कृति का निर्माण करते हैं।‘‘(2)
प्राचीन काल से ही परिवार एवं उनके सदस्यों में दया, करुणा, आपसी प्रेम एवं सहानुभूति होती थी। परिवार के लोग आपस में मिलजुल रहते एवं सहयोग भी करते थे परंतु आधुनिक युग में यह पारिवारिक एकता बिखरती जा रही है। प्रत्येक परिवार में तनावपूर्ण माहौल बना रहता है। संयुक्त परिवार टूटकर एकल परिवार में बदलने लगे हैं। मनुष्य समाज के साथ-साथ अपने परिवार से भी दूर होने लगा है। जिसके कारण रिश्तों में भी बिखराव लगा है।

References

ईमाइल दुर्खिम, समाज दर्शन की रूपरेखा, पृ. 97

ण् एफ. एच. गिडिंग्स, प्रिंसिपल्स ऑफ सोशियोलॉजी, पृ. 11

ण् कमल कुमार, मदर मेरी और अन्य कहानियाँ, पृ. 142

ण् कमल कुमार, अंतर्यात्रा, पृ. 19

ण् कमल कुमार, अंतर्यात्रा, पृ. 138

ण् वही पृ. 19

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How to Cite

हरिस्वरुप, & डाॅ मीनेश जैन. (2026). कमल कुमार के कथा-साहित्य में बिखरते पारिवारिक रिश्ते. International Journal of Engineering Science & Humanities, 16(1), 1297–1303. Retrieved from https://www.ijesh.com/j/article/view/1287