हरियाणा के सोनीपत और रोहतक जिलों में कृषक समाज: परंपरा से आधुनिकता तक (1966–2010)

Authors

  • सचिन
  • डॉ राजबीर सिंह गुलिया

Keywords:

कृषक समाज, हरित क्रांति, भूमि सुधार, उदारीकरण, सोनीपत, रोहतक, हरियाणा

Abstract

यह शोध पत्र हरियाणा के सोनीपत और रोहतक जिलों में 1966 से 2010 तक कृषक समाज में आए निरंतरता और परिवर्तन की प्रक्रिया का विश्लेषण करता है। हरियाणा का गठन 1966 में हुआ, और इसी वर्ष हरित क्रांति की शुरुआत भी मानी जाती है। यह अध्ययन दर्शाता है कि किस प्रकार हरित क्रांति, भूमि सुधार, तकनीकी प्रगति, और 1990 के दशक के उदारीकरण ने इन दो जिलों के कृषक समाज के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को मूल रूप से बदल दिया। अध्ययन में पाया गया कि हरित क्रांति ने कृषि उत्पादकता में वृद्धि की, लेकिन साथ ही वर्ग विभेद, जातिगत असमानता और भूमि-केंद्रित सत्ता संरचनाओं को भी मजबूत किया। 1990 के बाद की उदारीकरण नीतियों ने कृषि को पूंजीवादी स्वरूप प्रदान किया, जिससे लघु और सीमांत किसानों का विस्थापन हुआ और कृषि श्रमिकों की संख्या में वृद्धि हुई। सोनीपत में शहरीकरण और औद्योगीकरण ने कृषि भूमि के रूपांतरण को तेज किया, जबकि रोहतक में कृषि आधुनिकीकरण और जातिगत सत्ता संरचनाओं में निरंतरता देखी गई। यह पत्र तर्क करता है कि इन दो जिलों में "परंपरा से आधुनिकता" का संक्रमण न तो रैखिक था और न ही सर्वसमावेशी; यह असमान, विरोधाभासी और जाति-वर्ग-लिंग द्वारा मध्यस्थ था।

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How to Cite

सचिन, & डॉ राजबीर सिंह गुलिया. (2026). हरियाणा के सोनीपत और रोहतक जिलों में कृषक समाज: परंपरा से आधुनिकता तक (1966–2010). International Journal of Engineering Science & Humanities, 16(1), 1289–1296. Retrieved from https://www.ijesh.com/j/article/view/1278