सोशल मीडिया के दौर में हिंदी कविता और कहानी का बदलता स्वरूप

Authors

  • डाॅ. प्रतिभा चौहान

Keywords:

सोशल मीडिया, हिंदी कविता, हिंदी कहानी, डिजिटल साहित्य, लघुकथा, माइक्रोफिक्शन, नव मीडिया, समकालीन हिंदी साहित्य

Abstract

सोशल मीडिया ने बीसवीं शताब्दी के अंतिम दशकों और इक्कीसवीं शताब्दी के आरंभ में साहित्य-सृजन, प्रकाशन और पाठकीय ग्रहणशीलता की समूची प्रक्रिया को बुनियादी रूप से बदल दिया है। प्रस्तुत शोध-पत्र फेसबुक, ट्विटर (एक्स), इंस्टाग्राम, यूट्यूब, ब्लॉग और व्हाट्सएप जैसे डिजिटल मंचों के विशेष संदर्भ में हिंदी कविता और हिंदी कहानी के बदलते स्वरूप का विश्लेषण करता है। अध्ययन स्पष्ट करता है कि सोशल मीडिया ने साहित्यिक अभिव्यक्ति को अधिक सुलभ, संक्षिप्त, तात्कालिक और सहभागितापूर्ण बना दिया है। कविता के क्षेत्र में क्षणिकाओं, हाइकु, दो-पंक्तिक शेरनुमा रचनाओं और सूक्तिपरक कविताओं का प्रचलन बढ़ा है, जबकि कहानी के क्षेत्र में लघुकथा, माइक्रोफिक्शन और धारावाहिक कथा-रूपों का उदय हुआ है। यह शोध-पत्र सोशल मीडिया द्वारा उत्पन्न कुछ गंभीर चुनौतियों — भाषिक शुद्धता का ह्रास, संपादकीय गुणवत्ता-नियंत्रण का अभाव, तात्कालिकता का दबाव, स्थायित्व की कमी और रोमन लिपि के बढ़ते प्रयोग — पर भी विचार करता है। शोध-पद्धति के रूप में वर्णनात्मक-विश्लेषणात्मक उपागम तथा द्वितीयक स्रोतों पर आधारित विषयवस्तु-विश्लेषण अपनाया गया है। निष्कर्षतः यह अध्ययन प्रतिपादित करता है कि सोशल मीडिया ने हिंदी साहित्य को अधिक लोकतांत्रिक, विकेंद्रित और बहुकेंद्रित बनाया है, नए लेखकों और पाठकों के मध्य सीधा संवाद स्थापित किया है, परंतु इसकी गुणात्मक चुनौतियों के समाधान हेतु साहित्यिक विवेक, संपादकीय अनुशासन और आलोचनात्मक दृष्टि की निरंतर आवश्यकता बनी हुई है।

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How to Cite

डाॅ. प्रतिभा चौहान. (2026). सोशल मीडिया के दौर में हिंदी कविता और कहानी का बदलता स्वरूप. International Journal of Engineering Science & Humanities, 16(3), 317–328. Retrieved from https://www.ijesh.com/j/article/view/1085